नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर

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Thursday, January 12, 2012

मेरा हमसफ़र

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एक बार फिर कौशल सा'ब का कलाम आपकी आँखों  में सरमाया करना चाहता हूँ क़ुबूल करें .. आपकी दुआओं का तलबगार रहूँगा.. आधा छूटा हुआ जाम खुल...
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Tuesday, November 22, 2011

हिना के जैसी सुन्दर थी

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वो कितनी प्यारी  प्यारी  थी कुछ खुशबू सौंधी  सौंधी थी कुछ हिना के जैसी सुन्दर थी कुछ गुलशन जैसी महकी थी कुछ समीर सी चंचल थी कुछ माखन सी...
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Saturday, November 12, 2011

तू भी कल प्यार में हो

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आज एक और कलम की इबारत आपके हाथों  में सौंप रहा हूँ. कौशल किशोर जो की एक इंजीनियरिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. उनकी लिखी एक नज़्म क...
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