नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर

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Monday, May 4, 2009

ग़ज़ल

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जूनून इलाहाबादी जी का इस रचना के साथ ब्लॉग पर तहेदिल से स्वागत करें- न कौम की बात करते हैं, न अमन को मुद्दा बनाते हैं, हम होली में र...
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