नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर

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Monday, August 17, 2009

क्षणिकाएं

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जमीं से आसमां बहुत दूर है, फिर मिलते से नज़र आते क्यों हैं, जब गिराने ही होते हैं मुकीमों को वो सारे मकाम, तो आसमां से मिलते मंजरों को बन...
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