नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर
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दीपक 'मशाल'
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दीपक 'मशाल'
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Sunday, April 18, 2010
ब्लॉगवुड को सांप्रदायिक दंगों की नींव बनने से रोकें ब्लोग्वानी, चिट्ठाजगत और अन्य एग्रीगेटर------>>>दीपक 'मशाल'
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बहुत दिनों से अपने आप को रोकने की कोशिश में लगा था कि जैसा चल रहा है चलने दो दुनिया के अन्य विभागों की तरह यहाँ ब्लॉग विभाग में भी हर तरह के...
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Wednesday, April 7, 2010
ये कैसी है जीत तुम्हारी---------->>>>दीपक 'मशाल'
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ये कैसी है जीत तुम्हारी ये प्रश्न उठे हैं आहों से हो लेते हो खुश तुम कैसे इंसानी चीखों से क्या मकसद पूरे कर पाओगे खून सने तरीकों से कि...
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