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Sunday, December 8, 2019

कविता -अमित अकबरपुरी








जीवन का सत्य मरण में है 

बाक़ी सब कुछ विचरण में है ,

जो उदय हुआ वो अस्त भी है

पागल मानव तो व्यस्त ही है 

एक हवा भी आएगी इक दिन

ले जायेगी साँसे भी इक दिन

ये भवन छोड़कर चल दोगे

होगा भू कम्पन भी इक दिन

ये स्वार्थ स्वार्थ का खेल सनम

ये व्यर्थ व्यर्थ का प्रेम सनम 

कुछ मिला नहीं कुछ मिलेगा क्या

आ साहिल पे संग बैठे हम !

Friday, December 6, 2019

बाल कविता








चूहे की घड़ी 
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टिक टिक टिक कौन 
चूहा बैठा है मौन 


बिल्ली से नाराज़ है 
शैतानी से बाज़ है 
खाना भी ना खाया है 
मनाए उसे कौन...


घड़ी चुरायी बिल्ली ने 
खरीदी थी जो दिल्ली में 
बिल्ली से ये डरता है 
गली में बनता डॉन...

टिक टिक टिक.. कौन 
चूहा बैठा है मौन 

-मुबीना खान 
लखीमपुर खीरी 
उत्तर प्रदेश