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Tuesday, February 15, 2011

यादों के हवाले से

अभी कल ही प्रेम दिवस बीता , और मुहब्बत की बात किसी ने छेड़ दी. उन चन्द लायनों को आपके साथ बाँटने जा रहा हूँ-

राहो मे चलते कई मुसाफिर मिलते है और फिर मिल के जुदा तो हो जाते है लेकिन अपनी यादो का समां कुछ इस तरह से छोड़ जाते है ..
"मिल के बिछड़ जायेगे फिर मिलेंगे कब
तुम न मिले तो तुम्हारी यादो से खुश हो जायगे
मांग लेना जो चाहो हमसे
चाहे तो हमारी जान,
न मांगना हमसे अपनी यादे
हम जिंदा तो रहेंगे फिर भी मर जायगे"

- रिज़वान इलाही