Friday, May 8, 2009

"बारिशों ने घर बना लिए "

यादें तेरी अश्रुविहल हो

असहाय कर गयीं,
आँखों मे कितनी
बारिशों ने घर बना लिए,
गूंजने लगा ये मौन.......
तुझको पुकारने लगा।
व्यथित हो सन्नाटे ने भी
सुर से सुर मिला लिए,
बिखरने लगे क्षण प्रतीक्षा के,
अधैर्य हो गयी
टूटती सांसो ने,
दुआओं मे तेरे ही
हर्फ सजा लिए ............
- सीमा गुप्ता

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