Tuesday, December 10, 2013

विनीता एजूकेशनल कैम्पेन - शिक्षा, जो कि समझ पैदा करती है

विनीता एजूकेशनल कैम्पेन
- शिक्षा, जो कि समझ पैदा करती है

शिक्षा एक ऐसा दान है, जिसे दान करने से आपका ज्ञान बढ़ता ही है, कम नहीं हो सकता. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, "कोशिश वेलफेयर सोसाइटी" , आज 07 दिसंबर 2013 से एक अभियान शुरू करने जा रही है. हमारी टीम की कोशिश है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति न रह जाए जो की शिक्षा से वंचित रहे.

इस अभियान को सफल बनाने के लिए हमें आपके सहयोग की ज़रुरत है. आप अपना योगदान शिक्षा के रूप में कभी भी कहीं भी दे सकते हैं. इंजीनियर्स, डॉक्टर्स , प्रोफेशनल्स , प्रोफेसर्स , ग्रेजुएट्स , इंटरमीडिएट , हाई स्कूल पास व्यक्ति हमारा योगदान कर सकते हैं.

हम समझ सकते हैं आप की व्यस्त ज़िन्दगी में समय निकालना मुश्किल है, इसीलिए आपकी दिनचर्या के हिसाब से शाम, सुबह , दोपहर जब आपको लगे की ये आपके पास उचित समय है, उस समय पर, आपके घर के सबसे पास स्थित स्कूल , कॉलेज में आप अपनी सेवाएँ दे सकते हैं ऐसा करने पर हमें भी ख़ुशी होगी , आपको भी ख़ुशी होगी, और जो शिक्षा ग्रहण करेंगे उन्हें भी ख़ुशी होगी.

आपके लिए सेंटर हमारी टीम निश्चित कर देगी. शिक्षा प्रसार के लिए, "कोशिश वेलफेयर सोसाइटी " का हाथ बंटाएं. और "विनीता एजूकेशनल कैम्पेन" को हर ज़रुरतमंद तक पहुंचा दें.

आप इस दान में अपनी पुरानी किताबें भी दान कर सकते हैं. अपने बैग, उन ज़रुरतमंदों को रबर, पेन्सिल, पेन, कॉपी और किताबें भी दे सकते हैं.

अगर आप इस तरह के दान देने की इच्छा रखते हैं तो हमें इस मेल आई. डी.

koshish.kanpur@gmail.com

shahid.ajnabi@gmail.com

पर अपनी डिटेल्स भेजने का कष्ट करें. हम आपके आभारी होंगे.

पूरे अभियान को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए "कोशिश वेलफेयर सोसाइटी " के महाप्रबंधक Avadhesh Sonkar को नियुक्त किया गया है

इस पूरे प्रोग्राम के संयोजक Sanjiv Singh हैं जो की प्रबंधन विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. इस अभियान की अध्यक्षता Shahid Mansoori (Asstt. Prof. In An Engg. College ) और Kaushal Kishor (Asstt. Prof. In An Engg. College )कर रहे हैं.

हमें आपके जवाबों का इंतज़ार रहेगा. प्रतीक्षा में -

शाहिद "अजनबी"

2 comments:

  1. Good to hear and read this.
    We are already running a school but due to non-availability of good teachers and economic teachers we are not doing our work fairly.
    Really felt ashamed with present system which is only to certify and every time deal with data.
    Policies are not made as per the requirement.
    Rural education has been ignore.
    Although ours is a private institution but not convert black money to white.
    So your effort is appreciable because you imparting education at the door step and your students will be those who are not sent by force but those only who like to be literate and to like to learn for progress not for job.

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-12-13 के चर्चा मंच पर दिया गया है
    कृपया पधारें
    आभार

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